July 2018

shivaji ko budhiya ki sikh

शिवाजी को बुढ़िया की सीख | शिवाजी महाराज के प्रेरक प्रसंग

एक बार शिवाजी युद्ध के दौरान बुरी तरह से थक गये । आस – पास कुछ न देख वह एक वनवासी बुढ़िया के घर में जा घुसे । बहुत भूख लगी थी अतः उन्होंने कुछ खाने के लिए माँगा । सैनिक समझकर बुढ़िया ने उनके लिए प्रेम पूर्वक भात पकाकर एक पत्तल पर परोस दिया […]

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शिवाजी की कहानियां

छत्रपति शिवाजी व समर्थ गुरु रामदास के प्रेरक प्रसंग

गुरुदेव की अमानत | शिवाजी का सन्यास छत्रपति शिवाजी अक्सर अपने गुरु समर्थ गुरु रामदास से मिलने जाया करते थे । समर्थ गुरु की मस्ती और आनंद को देखकर शिवाजी का मन भी कभी – कभी इस परेशानियों से भरे राजकाज से छुटकारा पाने को करता था । दिन दुगुनी रात चौगुनी समस्याओं से लड़ते

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ishvar vishvas ki kahaniya

ईश्वर विश्वास की तीन आध्यात्मिक कहानियां

ईश्वर विश्वास की पराकाष्ठा एक बार दो व्यक्ति व्यापार के लिए दुसरे देश गये । उन दोनों में से एक था पक्का आस्तिक और एक था पक्का नास्तिक । आस्तिक अपने जीवन में हमेशा ईश्वर को धन्यवाद देता था । चाहे उसके साथ अच्छा हो या बुरा । नास्तिक हमेशा ईश्वर को कोसता रहता था

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paramhansa vishuddhanand

स्वामी विशुद्धानन्द परमहंस के अद्भुत प्रसंग

बंगाल राज्य के वर्धमान जिले के बण्डूल में चट्टोपाध्याय वंश लम्बे समय से अतिथि सेवा और भक्ति के लिए प्रसिद्ध है । फाल्गुन मास का 29वा दिन था, वसंत का आगमन हो चुका था, जन्म जन्मांतरों के पुण्य फल का उदय हुआ था जो श्री अखिल चंद्र चट्टोपाध्याय और उनकी सहधर्मिणी देवी राजराजेश्वरी को भगवती

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रामकृष्ण परमहंस का केंसर और माँ काली की कहानी

स्वामी रामकृष्ण परमहंस का आत्मवत्सर्वभूतेषु का विचार

स्वामी रामकृष्ण परमहंस न केवल दक्षिणेश्वर काली के पुजारी थे, बल्कि माँ काली के परमभक्त भी थे । वह अक्सर माँ काली के साक्षात् दर्शन करते थे, तथा उन्हें भोजन कराते थे । सौभाग्य से वही स्वामी विवेकानंद के गुरु भी हुए । एक बार की बात है । जब स्वामी रामकृष्ण परमहंस को गले

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कर्ण का वध कैसे हुआ

कर्ण के जीवन की दो बड़ी गलतियाँ क्या है | कर्ण वध महाभारत

कभी कभी अनजाने में हमसें ऐसी गलतियाँ हो जाती है, जिन्हें लाख कोशिशों के बावजूद भी सुधारा नहीं जा सकता । ऐसा ही कुछ अंगराज कर्ण के साथ हुआ था । अंगराज कर्ण ने अपने जीवन में दो गलतियाँ ऐसी की थी । जिसका परिणाम अंत में उन्हें मृत्यु के रूप में मिला । कर्ण

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गृहस्थ और सन्यासी

गृहस्थ बड़ा या सन्यासी – प्रेरणाप्रद कहानी

प्राचीन समय की बात है । किसी नगर में एक विचित्र राजा रहता था । उस राजा की एक बड़ी ही अजीब आदत थी । जब भी नगर में कोई साधू या सन्यासी आता था तो वह उसे बुलाकर पूछता था कि – “ गृहस्थ बड़ा या सन्यासी ?” जो भी बताता कि गृहस्थ बड़ा

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सही गलत सुविचार

आस्तिक और नास्तिक में अंतर | आस्तिकता की कहानी

अगर “ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास” की दृष्टि से देखा जाये तो दुनिया में दो प्रकार के लोग होते है – एक आस्तिक, दूसरा नास्तिक । आस्तिक उसे कहते है जो ईश्वर के अस्तित्व को मानता है । इसके विपरीत नास्तिक उसे कहते है जो ईश्वर के अस्तित्व को नहीं मानता । क्या ईश्वर का

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विषकन्या ने राजा को विष दिया

विषकन्या क्या होती है | विषकन्या की ऐतिहासिक कहानी

वैदिक साहित्य, लोक कथाओं और इतिहास के अनुसार विषकन्या उस स्त्री को कहा जाता है, जिसे बचपन से ही थोड़ा – थोड़ा विष देकर जहरीला बनाया जाता है । इन्हें विषैले वृक्ष और जीव – जंतुओं के बीच रहने का अभ्यस्त बनाया जाता है । इसी के साथ ही स्त्रियोचित गुणों जैसे गायन, नृत्य और

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sahanshilta par kahani

सहनशक्ति का महत्त्व | सहनशीलता की कहानी

बेटे की शादी हुई और जैसे ही नई नवेली दुल्हन का आगमन हुआ । माँ ख़ुशी से नाचने लगी । माँ को ऐसा लगा जैसे उसके सारे अरमान पलभर में पुरे हो गये हो । शुरुआत में तो माँ ने बहु को बड़े ही लाड़ – प्यार से रखा, लेकिन जैसे – जैसे दिन बीतते

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